उत्तराखंड में स्कूल फीस को लेकर जारी नए दिशानिर्देश

कोरोनावायरस के चलते लॉकडाउन के दौरान स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बनी हुई है। सरकार ने ताजा फैसले में प्राइवेट स्कूलों को एक राहत और दे दी है। यदि स्कूल नियमित विषयों के इतर किसी अतिरिक्त विषय की भी ऑनलाइन पढ़ाई कराते हैं तो उसकी फीस भी ले सकते हैं। प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर जारी विवाद में सरकार ने सोमवार को फैसला कर दिया।

हाईकोर्ट के आदेश पर फीस विवाद की सुनवाई के बाद शिक्षा सचिव आर मीनाक्षीसुंदरम ने सोमवार को प्राइवेट स्कूल और अभिभावकों के लिए नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। लॉकडाउन अवधि में भी नियमित वेतन पा रहे सरकारी-अर्द्धसकारी कर्मचारियों को बच्चों की फीस नियमित रूप से अदा करनी होगी।

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फीस केवल वे स्कूल ही ले सकेंगे, जो नियमित रूप से ऑनलाइन या किसी अन्य माध्यम से पढ़ाई करा रहे हैं। अब तक फीस का भुगतान करना अभिभावकों पर निर्भर था।

नए आदेश सभी डे और डे बोर्डिंग स्कूलों पर लागू होंगे। शिक्षा सचिव ने बताया कि इस आदेश के जारी होते ही फीस को लेकर जारी अब तक सभी आदेश निरस्त हो गए हैं।

फीस के मानक

  • शैक्षिक सत्र 2020-21 में फीस में वृद्धि नहीं की जाएगी।
  • केवल ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई कराने वाले स्कूल ही फीस लेने के हकदार होंगे। यदि किसी अतिरिक्त विषय की भी ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है तो उसका शुल्क भी स्कूल ले सकते हैं।
  • पढ़ाई के बावजूद फीस देने में असमर्थ अभिभावक स्कूल प्रिंसीपल को लिखित आवेदन करेंगे। स्कूल प्रबंधन फीस भुगतान के लिए उन्हें एक तय समय देगा।
  • स्कूल केवल ट्यूशन फीस लेंगे। इसके अलावा कोई अन्य चार्ज नहीं लिया जाएगा।
  • फीस न दे पाने की वजह से किसी भी छात्र का नाम किसी भी सूरत में नहीं काटा जाएगा।
  • जिन अभिभावकों की आजीविका पर असर नहीं पड़ा है, उन्हें नियमित रूप से ट्यूशन फीस देनी होगी।
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हम सरकार के फैसले के साथ हैं। ट्यूशन फीस के बजाए पूरी फीस लागू होती तो बेहतर होता। इस साल फीस वृद्धि न करने का आदेश स्वीकार्य है। साथ ही फीस न दे पाने वाले अभिभावकों को भी रियायत दी जाएगी। सरकार ने नियमित विषयों के इतर विषय पढ़ाने पर उसकी फीस लेने की अनुमति दे दी है।

प्रेम कश्यप, अध्यक्ष-पीपीएसए

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