Report: 3 मई के बाद उत्तराखंड का एक जिला रेड जोन, 2 जिले ऑरेंज जोन, बाकी 9 जिले ग्रीन जोन में रखे गए: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय।

स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से तीन मई के बाद जिलों को अलग-अलग जोन के हिसाब से बांटने का काम किया गया है।
देहरादून और नैनीताल को जहां ऑरेंज ऑन में रखा गया है वहीं हरिद्वार को रेड जोन में रखा गया है।देश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिसकी वजह से सरकार अपनी रणनीति में बदलाव कर रही है। हर जिले और राज्य की मौजूदा स्थिति को देखते हुए आगे की राह बनाई जा रही है। देश के कई जिले रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में बंटे हुए हैं।

For Uttarakhand Sl 698 to 710

हालांकि इस बार उनके पैमानों को बदला गया है। मंत्रालय ने कोरोना मामलों की संख्या, डबलिंग रेट और परीक्षणों के हिसाब से जिलों की नई सूची तैयार की है। जिसमें बताया गया है कि कौन सा जिला किस जोन में आता है और वहां किस तरह की सख्ती बरती जाएगी।
केंद्रीय गृह सचिव प्रीति सूडान ने कहा, ‘सभी राज्यों से अनुरोध किया जाता है कि वे चिन्हित किए गए रेड और ऑरेंज जोन जिलों में कंटेनमेंट जोन और बफर जोन का परिसीमन करें और उन्हें सूचित करें। किसी जिले को तब ग्रीन जोन माना जाएगा जब वहां पिछले 21 दिनों में कोरोना का कोई भी नया मामला सामने नहीं आएगा।’ सूची में तीन मई के बाद 130 जिलों को रेड, 284 को ऑरेंज और 319 जिलों को ग्रीन जोन में शामिल किया गया है।

Also Read  उत्तराखंड में आज फिर तेजी से बढ़े कोरोनावायरस के नए मामले, जानिए ताजा आंकड़े

स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, बंगलूरू, अहमदाबाद को अब भी रेड जोन में ही रखा है। इसके अलावा महाराष्ट्र के 14, दिल्ली के 11, तमिलनाडु के 12, उत्तर प्रदेश के 19, बंगाल के 10, गुजरात के नौ, मध्य प्रदेश के नौ, राजस्थान के आठ जिले रेड जोन में शामिल हैं।

सूडान ने कहा, ‘एक या अधिक नगर निगमों वाले, निगमों और जिले के अन्य क्षेत्रों को अलग-अलग इकाइयों के रूप में माना जा सकता है। यदि वे रेड या ऑरेंज जोन में आते हैं, यहां इनमें से एक या अधिक में पिछले 21 दिनों में कोई नया मामला दर्ज नहीं होता तो उन्हें आंचलिक वर्गीकरण में एक स्तर कम माना जा सकता है।’

Also Read  देहरादून में शनिवार और रविवार दुकानों की बंदी को लेकर बड़ा फैसला

उन्होंने आगे कहा, ‘बफर जोन में स्वास्थ्य सुविधाओं में आईएलआई/ एसएआरआई मामलों की निगरानी के माध्यम से मामलों की व्यापक निगरानी की जानी चाहिए। राज्यों से अनुरोध किया जाता है कि वे चिन्हित रेड और ऑरेंज जोन जिलों में कंटेनमेंट जोन और बफर जोन का परिसीमन करके उन्हें सूचित करें।’

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here