एक्सपर्ट के संग बनाइए पक्की रणनीति, जानिये किस share में करें निवेश या किससे रहें दूर

कोरोना के चलते बाजार में भारी उठापटक चल रही है। उछाल और गिरावट के बावजूद बाजार में पैसा बनाया जा सकता है। कई निवेशकों ने इस लॉकडाउन के पहले शेयरों में निवेश किया है जबकि कुछ निवेशकों ने लॉकडाउन के दौरान भी शेयर खरीदे हैं। आगे चलकर वे निवेशक इन शेयरों में पैसा बनायेंगे कि नहीं। उन्हें इन ट्रेड्स में बने रहना चाहिए, निकल जाना चाहिए या मुनाफावसूली करनी चाहिए इस पर मार्केट एक्सपर्ट INDIRA SCURITIES के RADHEY SHYAM JI अपनी राय दे रहे हैं।

 RADHEY SHYAM जी ने निफ्टी पर राय देते हुए कहा कि कल एक ब्रेकडाउन देखा गया था। वहां से रिकवरी हुई है। निफ्टी 9200 के ऊपर आया था। इसमें आज 9500  तक पुल बैक आ सकता है। हालांकि निफ्टी की बजाय अच्छे स्टॉक्स पर फोकस करना चाहिए,

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क्या केमिकल इंडस्ट्री भारत मे एक नया इमर्जिंग सेक्टर बन कर उभर सकता है?

क्या केमिकल इंडस्ट्री भारत मे एक नया इमर्जिंग सेक्टर बन कर उभर सकता है? भारत मे आटो , आईटी, FMCG मे निवेश करके निवेशकों बहुत अच्छा लाभ कमाया है। अब केमिकल इंडस्ट्री मे भी कुछ ऐसा ही होता नजर आ रहा है। भारत इस समय सभी इंडस्ट्री मंदी के दौर से गुजर रही है इसके विपरीत केमिकल इंडस्ट्री अपनी ग्रोथ बनाये रखे हुये है।

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भारत मे पिछली तिमाही मे 10 बड़ी केमिकल कम्पनियों की औसत लाभ मे लगभग 48 % की ग्रोथ रही है। सभी बाजार एक्सपर्ट मानना है यह ग्रोथ जारी रह सकती है।

क्रेडिट सुइस एनालिस्टो के अनुसार केमिकल इंडस्ट्री की ग्रोथ दुगुनी हो सकती है। केमिकल कम्पनियों के शेयर अपने उच्चतम स्तर पर चल रहे है। टाप परफॉर्मेंस दीपक नाइट्राइट, आरती इंडस्ट्रीज, SRF, अतुल और विनती आर्गेनिक्स शामिल है।

घरेलू बढ़ती खपत और ग्लोबल एक्सपोर्ट भी बढ़ रहा है। अनुमान के मुताबिक भारत मे केमिकल का कंजम्पशन ग्बोबल कंजम्पशन 20% के बराबर है । वर्तमान समय 45% डिमांड अब भी इंपोर्ट से पूरी की जाती है। चीन मे बहुत सी चाइनीज कम्पनियां बंद हो रही है। इसका सीधे सीधे लाभ इंडियन केमिकल कम्पनियों को मिलेगा।

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भारत एक बड़ वैकल्पिक ग्लोबल बाजार बनकर उभर सकता है। इसलिए वाल्यूम मे बढ़ोतरी के साथ केमिकल दाम भी बढ़े है। केमिकल्स का $430 का ग्लोबल एक्सपोर्ट बाजार है। जिसमे से यूरोप 20% और 20 चीन का है । भारत का ग्लोबल हिस्सेदारी बहुत कम है लेकिन पिछले पांच साल मे 3.3 से बढ़कर यह 4.5 पहुच गई है। और चीन मे कम्पनियां बंद होने के कारण दो तीन साल यह हिस्सेदारी 10प्रतिशत पहुच सकती है।

सौजन्य , राधेश्याम चौहान ( Indira Securities)
शोभित अग्रवाल
शेयर बाजार विश्लेषक

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